सामाजिक अनुसंधान एवं सांख्यिकी (Samajik Anusandhan Avam Sankhiyki — Social Research and Statistics) – Hindi

Satyendra Tripathi and Anil Kumar Srivastava

सामाजिक अनुसंधान एवं सांख्यिकी (Samajik Anusandhan Avam Sankhiyki — Social Research and Statistics) – Hindi

Satyendra Tripathi and Anil Kumar Srivastava

-15%1101
MRP: ₹1295
  • ISBN 9788131608340
  • Publication Year 2017
  • Pages 326
  • Binding Hardback
  • Sale Territory World

About the Book

सामाजिक विज्ञान मनुष्यता के संरक्षण और मानवीय मूल्यों के विकास एवं प्रगति का मूलाधार है। ज्ञान के शेष अनुशासन एकपक्षीय होते हैं, चाहे वे कितना भी महत्वपूर्ण हो और अपरिहार्य ही क्यों न हो। समाजिक घटनाओं के अध्ययन की अपनी वैज्ञानिक दृष्टि एवं पद्धतियां होती हैं, जिनके माध्यम से हम अनुभावात्मक परिपेक्ष्य प्रस्तुत करते हैं। यह पुस्तक सामाजिक विज्ञानों की घटनाओं के अध्ययनों की प्रविधियों एवं पद्धतियों का विवेचन है।
    इसमें ‘सामाजिक अनुसंधान’ के समस्त पहलुओं को सरल परन्तु उच्चस्तरीय रूप में समझाने का प्रयास किया गया है।
•    सांख्यिकी तत्वों को सरलतम विधियों से प्रस्तुत करते हुए इसकी विस्तृत विवेचना की गई है।
•    विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए पुस्तक की विषय-सामग्री को प्रमाणित एवं वैज्ञानिक स्तर पर लाने का प्रयास किया गया है।
•    संकलित विषय सामग्री की आलोचनात्मक व्याख्या सरलता एवं सहजता के आधर पर की गई है।
•    अंग्रेजी के प्रचलित परिभाषित शब्दों का सरलतम हिन्दी में अनुवाद एवं प्रयोग करते हुए इसके विद्यार्थियों के लिए अधिकाधिक उपयोगी बनाने का प्रयास किया गया है।


Contents

•    सामाजिक विज्ञान एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण
•    अनुसंधान की पद्धतिशास्त्रीय प्रवृत्तियां
•    अवधारणा, तथ्य और सिद्धांत
•    अवधारणा
•    ऐतिहासिक पद्धति
•    सांख्यिकीय पद्धति
•    प्रयोगात्मक पद्धति
•    सामाजिक अनुसंधान की प्रकृति एवं क्षेत्र
•    सामाजिक सर्वेक्षण
•    उपकल्पना
•    शोध प्रारूप
•    निदर्शन प्रणाली
•    वैयक्तिक अध्ययन
•    अवलोकन
•    साक्षात्कार
•    प्रश्नावली
•    अनुसूची
•    अन्तर्वस्तु विश्लेषण
•    समाजमिति
•    प्रक्षेपण प्रविधियां
•    अनुमापन
•    अन्तरानुशासनीय अभिगम   
•    समंकों (आंकड़ों) का संग्रहण
•    समंकों का वर्गीकरण तथा सारिणीकरण
•    चित्रों द्वारा समंकों का प्रदर्शन
•    सांख्यिकी की प्रकृति एवं क्षेत्र
•    सांख्यिकीय माध्य
•    सहसंबंध
•    प्रमाप विचलन
•    काई-वर्ग परीक्षण


About the Author / Editor

सत्येन्द्र त्रिपाठी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष थे तथा एसबीआई चेयर पर समन्वित ग्रामीण विकास केन्द्र के निदेशक थे। उन्होंने उत्कल व कुमाऊं विश्वविद्यालयों के समाजशास्त्र विभाग का संगठन भी किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वे संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रमों से जुड़े रहे। उन्होंने व्यापक रूप से अंग्रेजी व हिन्दी में पुस्तकों की रचना की। वे भारतीय समाजशास्त्र परिषद के महामंत्री तथा उत्तर प्रदेश समाजशास्त्र परिषद के अध्यक्ष थे। उनका शैक्षणिक कार्यक्षेत्र समाजशास्त्र सिद्धांत, सामाजिक अनुसंधान व तीसरी दुनियां के देशों में विकास प्रक्रियाओं का अध्ययन रहा है।

अनिल कुमार श्रीवास्तव ने 1977 में लखनऊ विश्वविद्यालय से स्वर्ण पदक के साथ एमए समाजशास्त्र की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद कुमाऊं विश्वविद्यालय से अपना शिक्षण कार्य प्रारम्भ किया। इसके बाद वे लखनऊ विवि में रीडर, प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष रहे। उन्होंने तीन पुस्तकें लिखीं व संपादित की। उनके राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ख्याति के कई शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। वर्तमान में वे लखनऊ विवि में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।


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